Saturday, September 27, 2025

चाय और कॉफी क्या है सच, कौन है 'भारतीय' और कौन 'विदेशी'?

क्या आप भी मानते हैं कि चाय हमारा "अपना" है और कॉफी विदेशी? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में लाखों लोग ऐसा ही सोचते हैं, पर सच्चाई कहीं और है। आइए, इस दिलचस्प कहानी को जानें और जानें कि कौन-कौन हैं इन दोनों पेय पदार्थों के असली 'मालिक'। चाय: चीन से आई, भारत की आत्मा में बस गई यह जानकर शायद आपको हैरानी होगी कि चाय की शुरुआत भारत में नहीं, बल्कि हज़ारों साल पहले चीन में हुई थी। वहाँ इसका इस्तेमाल पहले एक दवा के रूप में होता था, और धीरे-धीरे यह एक लोकप्रिय पेय बन गया। भारत में चाय का आना कोई पुरानी भारतीय परंपरा नहीं, बल्कि यह एक ब्रिटिश रणनीति का हिस्सा था। 19वीं सदी में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी चीन के चाय व्यापार पर बहुत निर्भर थी। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए उन्होंने भारत में बड़े पैमाने पर चाय की खेती शुरू करने का फैसला किया। असम और दार्जिलिंग की जलवायु चाय के लिए एकदम सही साबित हुई। ब्रिटिशों ने यहाँ बड़े-बड़े बागान लगाए और भारतीयों को चाय पीना सिखाया। धीरे-धीरे, चाय भारत की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा बन गई। आज, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चाय उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता है, और इसीलिए हम इसे 'भारतीय' मानते हैं। कॉफी: एक भारतीय संत की विरासत कॉफी की कहानी और भी दिलचस्प है। यह सच है कि कॉफी की उत्पत्ति इथियोपिया में हुई थी और इसे यमन में लोकप्रिय बनाया गया था। पर भारत में इसकी शुरुआत किसी विदेशी व्यापारी ने नहीं, बल्कि एक भारतीय संत ने की थी। कहानी कुछ इस तरह है: 17वीं शताब्दी में, बाबा बूदन नाम के एक सूफी संत हज की यात्रा पर मक्का गए थे। उस समय अरब से कॉफी के बीजों को बाहर ले जाना सख्त मना था। बाबा बूदन को कॉफी इतनी पसंद आई कि वे चुपके से सात कॉफी के बीज अपनी दाढ़ी में छिपाकर भारत ले आए। उन्होंने इन जादुई बीजों को कर्नाटक की चंद्रगिरि पहाड़ियों में बोया, यह जगह अब 'बाबा बूदन गिरि' के नाम से जानी जाती है। यह माना जाता है कि भारत में पहली कॉफी इसी जगह पर उगी थी। बाद में, ब्रिटिशों ने यहाँ भी व्यावसायिक स्तर पर कॉफी की खेती शुरू की, लेकिन इसकी नींव एक भारतीय ने ही रखी थी। निष्कर्ष: दोनों हमारे हैं, दोनों अनमोल हैं तो, सच्चाई यह है कि न तो चाय पूरी तरह से भारतीय है और न ही कॉफी पूरी तरह से विदेशी। चाय चीन से आई, लेकिन यह हमारी संस्कृति में इतनी गहराई से बस गई कि यह अब हमारी पहचान बन चुकी है। कॉफी को एक भारतीय संत भारत लेकर आए थे, और आज इसका उत्पादन और स्वाद हमारी अपनी पहचान है। अगली बार जब आप चाय या कॉफी का कप उठाएं, तो याद रखें कि दोनों ही पेय पदार्थों का भारत से एक गहरा और दिलचस्प संबंध है। दोनों ही हमारी विरासत का हिस्सा हैं।

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